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Dr Manoj Kumar brief profile

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Dr MANOJ KUMAR Assistant professor Department of Psychology NLS College a PG center, Jaitpur-Daudpur ,Saran (constitute unit of JP university, Chapra ,Bihar) MM college, Gopalganj (JP University, Chapra, Bihar) Founder -Counselling and Psychotherapy center, patna(Dr Manoj Kumar) Experience-14 years and more plus in Mental health wellbeing Previous Award :" दिव्यांगजनों के जीवन में सुधार हेतु सर्वोत्तम अनुप्रयुक्त अनुसंधान/नवप्रवर्तन/उत्पाद विकास "श्रेणी अन्तर्गत उत्कृष्ट प्रदर्शन हेतु राज्य स्तरीय सम्मान 2020 द्वारा समाज कल्याण विभाग, बिहार सरकार । Award-Mental Health professional ,Disability Department, Government of Bihar Hind chakra  Award  and more plus  Designation:Clinical psychologist, child home,patna,Social welfare department, Government of Bihar(3 hours all working days) Authorized consultant Psychologist, Air Force, Bihata,Ministry of defence, Government of India(वरिय मनोवैज्ञानिक,भारतीय वायु सेना,बिहटा )(Thursday 3 hours) Member-District Inspection Comitee,Pat...

बच्चों के व्यवहार को कैसे समझें।जानिए डॉ॰ मनोज कुमार से।

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बदलता बचपन उलझते रिश्ते ! ---------------------------------- डॉ॰ मनोज कुमार ------------------------------------- बच्चे ईश्वर का एक वरदान है। ज्यादातर समय इनका घर व स्कूल में बितता है। परिवार के सदस्यों से इनका भावनात्मक जुङाव होता हैं वहीं वह विद्यालय में भी अपने जीवन का अहम हिस्सा गुजारते हैं। कुछ बाते घर की होती है। तो बच्चों के व्यवहार बङे-बुजुर्ग आसानी से समझ लेते हैं। कुछ मामले में जब आपका बच्चा बाहर में समायोजित नही होता तब उसके व्यवहार में व्यापक बदलाव देखने को मिलते हैं। साथियों का दबाव। -------------------------- आपका बच्चा स्कूल से  आकर सीधे औधें मुंह बिस्तर पर पसर जाता है। आपके सीधे सवालों के जवाब चिङचि़ङे होकर देता है। खाना की आदत आपके लिए परेशानी का सबब बन रही तो ऐसे में आपको सचेत होने की जरूरत है। आपका बच्चा किसी न किसी दबाव में है। एजुकेशनल समस्या कर रही हलकान। ----------------------------- अभी एक्जाम शुरू होनेवाले हैं और कुछ के  रिजल्ट आयें हैं और इसके  साथ ही साथी बच्चे के परिणाम भी  आये हैं ।  यह  परिणाम छात्रों के समक्ष है। छात्र-छात्राओ...

आइये जाने बच्चों का आधुनिक व्यवहार ।

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बदलता बचपन उलझते रिश्ते ! ---------------------------------- डॉ॰ मनोज कुमार ------------------------------------- बच्चे ईश्वर का एक वरदान है। ज्यादातर समय इनका घर व स्कूल में बितता है। परिवार के सदस्यों से इनका भावनात्मक जुङाव होता हैं वहीं वह विद्यालय में भी अपने जीवन का अहम हिस्सा गुजारते हैं। कुछ बाते घर की होती है। तो बच्चों के व्यवहार बङे-बुजुर्ग आसानी से समझ लेते हैं। कुछ मामले में जब आपका बच्चा बाहर में समायोजित नही होता तब उसके व्यवहार में व्यापक बदलाव देखने को मिलते हैं। साथियों का दबाव। -------------------------- आपका बच्चा स्कूल से  आकर सीधे औधें मुंह बिस्तर पर पसर जाता है। आपके सीधे सवालों के जवाब चिङचि़ङे होकर देता है। खाना की आदत आपके लिए परेशानी का सबब बन रही तो ऐसे में आपको सचेत होने की जरूरत है। आपका बच्चा किसी न किसी दबाव में है। एजुकेशनल समस्या कर रही हलकान। ----------------------------- अभी एक्जाम शुरू होनेवाले हैं और कुछ के  रिजल्ट आयें हैं और इसके  साथ ही साथी बच्चे के परिणाम भी  आये हैं ।  यह  परिणाम छात्रों के समक्ष है। छात्र-छात्राओ...

जब तक पिता जी के छांव में थे!सच पूछिये हम जी रहे थे बङे बेफिक्र होकर।उनके कोमल स्पर्श से बन ऊर्जावान !सिर पर मिले आशीष से हर दुःख, मानो हो जाता था चित।वह थे तो दुनिया रंग-बिरंगी मानोइंद्रधनुषी रंग से नहायी !सपने देखा जब भी मैंने , अगले पल हौसला पिताजी ने बढाया।वह थे तो मानो मन की थी रोज दिवाली !रूखी -सूखी रोटियां भी स्वाद में निराली थी।जिनकी उंगली पकङ इठलाया था कभी!करोङो के दौलत भी मानो अब बेमानी।पिता हैं तो सब सुख है!हम सब प्राणियों का वजूद है।उनके बिना जीवन में क्या चैन!इस जीवन में माता-पिता हैं अनमोल।पिता को समझिए,वह दर्शन हैं !वह तो इस संसार में हमारे नींव निर्माता ।ईश्वर की तरह पिता को पूज लिए जिस संतान ने!जीवन के असल मायने पा लिए उस इंसान ने।🙏🙏-डॉ॰ मनोज कुमार

संक्षिप्त में जानें डॉ॰ मनोज कुमार के बारे में

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Dr MANOJ KUMAR Founder-Counselling and Psychotherapy center, patna(Dr Manoj Kumar) Experience-13 years and more plus in Mental health wellbeing Previous Award :"दिव्यांगजनों के जीवन में सुधार हेतु सर्वोत्तम अनुप्रयुक्त अनुसंधान/नवप्रवर्तन/उत्पाद विकास "श्रेणी अन्तर्गत उत्कृष्ट प्रदर्शन हेतु राज्य स्तरीय सम्मान 2020 द्वारा समाज कल्याण विभाग, बिहार सरकार । Award-Mental Health professional ,Disability Department, Government of Bihar Hind chakra  Award  and more plus  Designation:Clinical psychologist, child home,patna,Social welfare department, Government of Bihar Authorized consultant Psychologist, Air force, Bihata,Ministry of defence, Government of India Member-District Inspection Comitee,Patna (DCPU/Administration PATNA) As Mental Health Expert Member-District Advisory Council, Patna(DCPC/समाहारणालय,पटना)As Mental Health Expert Email- Address:dr.manojpat@rediffmail.com City:patna  State:Bihar  Mobile No. :9835498113 . Alternate No. :8298929114 - Resources per...

देवतुल्य पिताजी के अमर आत्मा के प्रकाश पुंज से प्रज्वलित मेरा उदीयमान मन।-डा.मनोज कुमार

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"न जायते म्रियते वा कदाचिन् नायं भूत्वा भविता वा न भूयः। अजो नित्यः शाश्वतोअ्यं पुराणों न हन्यते हन्यमाने शरीर ।।" हे पिता आप ईश्वर के रुप में साक्षात् मेरे जीवन को तराशते रहें।कर्म के लिए तैयार भी किया।आपकी आत्मा को श्रीहरि विष्णु अपने चरणों में स्थान दें।भगवान रूपी ऊर्जा से परिपूर्ण आपने हमेशा मेरे चित्त को संवारा। जीवन को समझने और लोगों की मदद के लिए योग्य बनाया।आपकी आत्मा को पहचानने में भूल हुयी हो तो क्षमा किया जायेगा।आपकी आत्मा किसी काल में न जन्मी है और नाहिं आपकी आत्मा की मृत्यु हुयी है। वह तो अजन्मा ,नित्य ,शाश्वत तथा पुरातन है। आपका शरीर भले ही इस नश्वर संसार में नही है। आपकी भौतिक आवाज को आज भले नही सुन रहा परंतु आपकी कृति विद्यमान है। आपकी सीख सदैव मेरे साथ है। आपके शरीर ने जन्म लिया इसलिए आपने शरीर का त्याग किया। आपकी आत्मा इतने वर्षों तक जिस शरीर में निवास कर रही थी। उस शरीर से उत्पन्न भौतिक शरीर में मेरे प्राण हैं। सच में मेरी आत्मा आपकी अनुपस्थिति में पूर्व में आपके द्वारा बटोरो स्नेह और अनुभव को महसूस कर सकता है।पूजनीय  पिताजी आप ज्ञान और चेतना से सदैव पूर्ण ...

डॉ॰ मनोज कुमार, मनोवैज्ञानिक, पटना संक्षिप्त परिचय ।

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Dr Manoj Kumar Founder/Director-counselling and psychotherapy center, patna Previous Award :"दिव्यांगजनों के जीवन में सुधार हेतु सर्वोत्तम अनुप्रयुक्त अनुसंधान/नवप्रवर्तन/उत्पाद विकास "श्रेणी अन्तर्गत उत्कृष्ट प्रदर्शन हेतु राज्य स्तरीय सम्मान 2020 द्वारा समाज कल्याण विभाग, बिहार सरकार ।  Designation:Clinical psychologist, child home,patna,Social welfare department, Government of Bihar Email- Address:dr.manojpat@rediffmail.com City:patna  State:Bihar  Mobile No. :9835498113 . Alternate No. :8298929114 मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ, सदस्य जिला सलाहकार समिति, समाहारणालय,पटना। जिला निरीक्षण सीमिति(जि.बा.सं.ई),जिला प्रशासन, पटना, बिहार । As State Co-ordinater, Psycho-Social support in Bihar ( pandemic covid-2019) More than two thouesends children with special need and others mental health issues was Helped (this project was free and sponsored by UNICEF, Bihar and Government of Bihar) -Book writer and columnist (All media) -Life time member CCI,India Address-L.C.T Ghat,Lane-3,ma...

जानिए कैसे बनेगें ऑफिस में आइडियल पर्सनैलिटी ।

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प्रोफेशनल लाईफ मैनेजमेंट:जानें चित्त की परख के गुर। ---------------------------- कार्यस्थल पर होनेवाले तनाव से बच व्यक्तिगत जीवन को दें नया आयाम। ---------------------------------- स्नेहा आज फिर परेशान होकर ऑफिस के एक कोने में अपने सहकर्मियों को कोस रही थी। उनको यह महसूस होता था कि लोग उनके काम करने और स्पष्टवादी सोच से जलन रखते हैं। पुरूष सहकर्मी उनके लिए दिखावे का प्यार मगर असल में अपनी ताकत और रूआब से छल रहे हैं। इससे पहले वह पटना में एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करती थी। वहाँ काम का समय निर्धारित नही था इसलिए घर और बच्चों पर वह ध्यान नही दे पा रही।पब्लिकेशन कंपनी के इस दफ्तर में भी स्नेहा असुरक्षित ही महसूस कर रही थी।सहकर्मियो का बर्ताव से स्नेहा का सरल स्वभाव गुस्से और अक्रामक स्वभाव की वजह से पति के साथ सदैव उनदोनो का अनबन हो रहा था। ऑफिस से घर आकर स्नेहा का शरीर जवाब दे देता था।मस्तिष्क ऐसा लगता था की किसी ने निचोङ कर रख दिया हो।वह मन ही मन डरने भी लगी थी। वह लाख चाहने के बावज़ूद ऑफिस के महौल में नही ढल पा रही थी।इस मुद्दे पर वह अपने कार्यालय के  बौस से भी बहुत म...

अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस(1/10/21)पर विशेष।

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जिंदगी दरिया ए उम्मीद ! ------------------------------ धुंआ खींच बेटा धुंआ!अस्सी साल हो गये मुझे परिवार की गाङी और नौकरी की जिम्मेदारी को निभाते हुए!सीढीयों से ऊपर चढते हुए जयंत बाबू ने अपने पोते मयंक पर तंज कसा।बङे बेफ्रिकी से वह युवा सिगरेट के कश लिए जा रहा था।जयंत बाबू के चश्मे पर पङे बारिश की बूंदे उनके व्यक्तित्व की चमक दिखा रहें थे। अपने कुरते से पानी के छीटें साफ करते हुए आसमान की ओर देखा।मयंक के सिगरेट के छल्ले गोल-गोल बादलों से उमङते-घुमङते दिख रहें थे। अपनी तीसरी पीढ़ी में इस तरह के व्यवहार देख उनके मन में कसक पैदा हो रही थी। आजकल के युवा अपने बुजुर्गों का ख्याल क्यों नही रखतें।ये सवाल उनके मन में कौंध रहा था। बार-बार वह अपने जीवन में झांकने की कोशिश कर रहे थे। कोई बीस साल पहले पटना सचिवालय से उनकी सेवानिवृत्ति हुयी।अपने काम और जज्बे से वह बिहार विधान सभा कार्यालय में नं एक की पोजिशन में रहें।विपक्ष हो या सत्तारूढ़ पार्टियां सबके लिए ईमानदार रहें ।जिस आयोग से वह चयनित हुए थे। उनको वहाँ भी उच्च कुर्सी मिली थी। अपने समय में वह सचिवालय की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए सुर्ख़ियो...

पत्तलचटवा

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पत्तलचटवा। ------------------- महेश्वर बाबू की साइकिल आज पंचर हो गयी थी। इसलिए आज वह सबलपुर पैदल ही कटाव का निरीक्षण करने आ गये थे। सामने से आ रहे एक नाबालिग ट्रैक्टर चालक ने उनकी धोती उङा दी।कीचङ से सने अपने कमीज की ओर देखा।54 वर्ष की उम्र में गाली देना अशोभनीय होता है। इसलिए पुरे ताकत से दांत पीसते हुए आगे निकल गये।वह मन ही मन सोच रहे थे की सोनपुर को अनुमंडल बने दो दशक से अधिक हो गये।हालात में क्या सुधार हुआ इसका जायजा लेने के लिए ही वह सोनपुर आमद से दक्षिण के गाँव भ्रमण को निकले थे। बङे-बङे पोस्टर में भावी मुखिया, सरपंच और पंचायत समिति के उम्मीदवार हाथ जोङे खङे है। बिना हेल्मेट के कुछ झंडा लिए नि-मुछिया लङके तेजी से जिंदाबाद के नारे लगाते हुए निकले जा रहें हैं। "प्रणाम ऐ महेश चा वोट देवे अलहू..ह !चापहू के भी व्यवस्था हव!प्रत्याशी के बैनर से मुंह ढके एक लङके ने आग्रह किया था। महेश्वर बाबू जैसे ही आवाज की दिशा में देखने की कोशिश कर पाये तबतक गाँव के ही बुझावन नाम के एक लङके का गुटका पचाक से उनके दाहिने कंधे पर पङ चुका था। महेश्वर बाबू स्वभाव से शांत प्रवृति के रहे हैं। अब धीरे-धी...

पटना के सरकारी विधालयों में पढने वाले बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के संबंध में वैश्विक महामारी (कोविड-19) प्रभाव का आनुभविक मनोवैज्ञानिक शोध अध्ययन ।(An empirical study of Covid-19 impact on patna based government school going children's mental health issues)Dr Manoj KumarC.psychologistPhD,PGDCR,PGCTW,(new Delhi)

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पटना के सरकारी विधालयों में पढने वाले बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के संबंध में वैश्विक महामारी (कोविड-19) प्रभाव का आनुभविक मनोवैज्ञानिक शोध अध्ययन ।(An empirical study of Covid-19 impact on patna based government school going children's mental health issues) Introduction of the study अध्ययन का संक्षिप्त परिचय । --------------- -किसी भी देश की यह जिम्मेवारी होती है की वह अपने नागरिकों का सर्वांगीण ख्याल रखें। -शिक्षा एक संवैधानिक अधिकार है और देश का हर राज्य इसे लागू करता है। -पटना,बिहार की राजधानी में शिक्षा विभाग बिहार सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त अनेकानेक विधालय है। -यहाँ सभी वर्ग के बच्चे पढते हैं। -मगर विगत वर्ष से कोरोना महामारी ने अपने पांव पसारे जिससे सरकारी स्कूलों में पढने वाले बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य बुरी तरफ प्रभावित होने लगे। -वैश्विक महामारी (कोविड-19)का आगमन नवंबर 2019 से हुआ। -हम सभी जानते हैं की यह एक दुसरे के संपर्क में आने से यह बीमारी होती है। इस संक्रामक रोग का जाल दुनिया के दुसरे देशों में फैलता गया है। -हिन्दुस्तान  में यह बीमारी काफी त्राहिमाम ...

सोशल मीडिया दे रहा महिलाओं को अचेतन के दुःख से उबङने का सुर।

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महिलाओं में अचेतन की छटपटाहट के प्रति सोशल मीडिया ने दिये विरोध के सुर। ------------------------------------- डॉ॰ मनोज कुमार ------------------------------------- हमारे संविधान में  महिला-पुरूष की समानता की वकालत की गयी है। लेकिन समाज में हर मामले में महिलाओं को वो अधिकार नही मिलें हैं जिनकी दरकार बदलते दौर में देखा जा रही।  महिलाओं को अबतक किसी समान की तरह ही समझा गया। समाज में महिलाओं की  एक कमजोर छवि प्रस्तुत की गयी। इसके बावजूद वह  रीती-रीवाजों व संस्कृतियों के दायित्व का वहन करती रही हैं। अब बच्चों के लालन-पालन की बात करें या पति के नखरे उठाने की दोनों ही जगह अपने जिम्मेदार होने के सबूत भी उन्होंने दिए।आप देंखें तो  शादी के बाद मिली नयी जिम्मेवारीयों का मामला हो या घर चलाने की बात हो ,नौकरी में मिले जिम्मेदारी का अहसास व नैतिक मूल्यों का निर्वाह बदलते समय में इनके व्यक्तित्व को निखारने का काम भी  कर रहा। हर वर्ग की  महिलाएं बदल रही अपनी  मानसिकता । ------------------------- दरअसल सैकड़ों सालो से महिलाओं के अचेतन में यह बात डाली गय...

मेरे बस में नहीं मेरा बेकाबू मन। _डॉ॰ मनोज कुमार

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मेरे बस में नहीं बेकाबू मन। ------------------------------------- डॉ॰ मनोज कुमार  --------------------- वह अभी कॉलेज का पहला लेक्चर  मैम  से सुना।काफी प्रभावित हुआ।कुछ दिन तक आवाज उसके कानों में गूंजती रही।एक दिन उसने पाया वह अपने टीचर के बारे में ठीक नहीं सोच रहा।बहुत सोचा,विचार किया फिर भी उसके मन से वह बात नही जा रही थी,अब वह खुद को द्वोषी मानने लगा।लोगों से कटकर जीने लगा।घुटन इतनी की पढाई पर भी ध्यान नही हो पा रहा।लाख जतन किया लेकिन अपने विचारों पर से नियंत्रण पा न सका।आयुषि गृहणी हैं। उम्र कोई तेतीस साल।उनके मन में सफाई का भूत सवार है।घर व दूसरे समान हमेशा चकाचक।सफाई के पीछे उनका इतना समर्पण है कि वह अपने पति व बच्चे का ख्याल नही रखती।अपने खफा हो रहे लेकिन उनको इसकी परवाह नहीं। सुकेश 38 साल के हैं। ।जब भी टीवी या अखबार में कुछ अप्रिय देखते -सुनते हैं उनमें अपने पुत्र के बारे में दुखद सोच आना शुरु हो जाता है।हर पल प्रियजनों की मृत्यु या अप्रिय अशुभ सोच उनकी दिनचर्या को चौपट कर रही।कभी नींद का उचटना तो कभी भूख की दूरी।सुख मानो कोसो दूर।चैन की बूंद भी नही।हर...

जानें डिप्रेशन के बारें में डॉ॰ मनोज कुमार, मनोवैज्ञानिक चिकित्सक के साथ ।

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मेरे जीवन में डिप्रेशन की शुरुआत 2019 में हुआ जब बिहार पुलिस में लिखित परीक्षा पास करने के बाद भी अंतिम रूप से चयनित नही हुआ ।बहुत बार इस तरह की कामयाबी मिलते-मिलते रह गयी थी। फंस्ट्रेशन में आकर मैंने लोगों से मिलना जुलना छोङ दिया।खाना-पीना भी अनियमित हो गया।करीब छ: मास तक उदास ही रहा।मरने का ख्याल आता रहा था।फिर मुझे मेरी बूढी दादी का ख्याल भी रहता।मुझे लगता की मेरे बाद इस लाचार का कौन होगा।तब एक बार मैने निश्चय किया की मुझे नौकरी नही मिली तो आगे व्यर्थ समय न गंवा।घर के आगे ही घङी रिपेयरिंग का काम शुरू कर दिया।इस काम में अनेकों लोगों से मुलाकात हुयी।खट्ठी-मीठ्ठी यादों के साथ उस दौर के बाद अब बहुत बदलाव महसूस करता हूँ ।जो है उसी में विश्वास के साथ अपना और दादी के साथ खुश होकर जी रहा।दिसंबर में मेरी शादी है। ये कहना है 26 वर्षीय आर्यन गुप्ता(परिवर्तित नाम) का जो नाला रोड ,पटना में रहते हैं। कुछ इसी तरह का मामला निवेदिता आनंद (परिवर्तित नाम)का भी है।वह रामजीचक दीघा,पटना की निवासी हैं। उन्होंने बताया कि उ‌नका ब्रेक- अप दो साल पहले हुआ।तब से बहुत रिश्ते शादी को आये।वह बङे गंभीर अंदाज में म...

जानें ओ.सी.पी.डी मानसिक विकार के बारे में ।

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मि.परफेक्टनिस धौंस की आङ में बीमारी तो नहीं । -------------------------------------- तेतालिस वर्षीय अशोक (परिवर्तित नाम)एक निजी कंपनी में तैनात हैं। बिहार में लौकडाउन के बाद अब यहाँ सभी सरकारी और प्राइवेट दफ्तरों को खोल दिया गया है। वर्क फ्रौम होम के बाद कर्मचारियों को अपने आप को ज्यादा से ज्यादा उपयोगी साबित करना है। अशोक अपने ऑफिस में सजग होकर काम करते रहे हैं। उनके बौस को उनका काम तो पसंद है पर वहाँ काम करने वाले अन्य स्टाफ एक दहशत महसूस कर काम करते हैं। अनलौक के बाद से उनके ऑफिस का नजारा बदला-बदला सा रह रहा है। हर दिन कंपनी के सीनीयर अपने आदेश को उसी दिन पूरा करना चाह रहें।बौस हर कार्य को सलीके से करवाना चाहते है। हर दिन नये  तरीके से काम को अंजाम देना अशोक करते रहें हैं पर बीच-बीच में बौस द्वारा थोड़ी सी भी गलती को लेकर उनका लंबा प्रवचन किसी को रास नही आता।अनेक बार अशोक के मन में नौकरी छोड़ दुसरी जगह ज्वाइन करने की बात आती रही है ।वह हमेशा बौस के रवैये में बदलाव आने की उम्मीद से वहाँ टिके हुए हैं। वैश्विक महामारी के पहले कितने लोग कार्यालय और बौस दोनों को छोङ चुके हैं। बौस को ...

विश्व तंबाकू निषेध दिवस 2021 पर विशेष कवर स्टोरी ।

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(31/5/2021)_विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर विशेष । तंबाकू छोङने में परिवार की भूमिका अहम। ---------------------------------  वैश्विक महामारी के इस दौर में कमजोर फेफड़े ने अनेकों जिंदगीयों को लील लिया है। ज्यादातर मामले में तंबाकू और इससे जुड़े उत्पाद हमारे रोजमर्रा के जीवन में शामिल हो रहे हैं।  लोग तंबाकू और इसके दुष्प्रभाव को  जानते तो हैं परंतु तंबाकू उत्पादों का सेवन उनकी मजबूरी हो सकती है। कुछ लोगों को खैनी व चाय की तलब होती है। वह इसके बिना अपनी दिनचर्या शुरू नही कर पाते हैं। वहीं कुछ युवाओं के बीच सिगरेट और कोल्ड ड्रिक्स को एक साथ लेते हुए देखा जा सकता है।इनके लिए सिगरेट के कश लगाना स्टेटस सिंबल माना जाता रहा है।ये ऐसे पदार्थ हैं जो तंबाकू उत्पादों से संबंधित निकोटिन होते है।इनके सेवन से फेफड़े में टार जमा होता है। इनका प्रभाव शरीर के साथ मन पर भी व्यापक असर के रुप में होता है। तंबाकू और निकोटीन से संबंधित नशा बच्चों और युवाओं के बीच लोकप्रियता के चरम पर है। युवाओं में यह भ्रांति धर कर बैठ जाती  है की उनके आलावा दुनिया में हर किसी शख्स को किसी न किसी चीज का नशा है...

आपस में मिल करें अद्वितीय शक्ति का आगाज।

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आपस में मिल करें अद्वितीय शक्ति का आगाज। --------------------------------------- पत्थरों में फूल खिला दें! बंजर भूमि को गुलशन बना दें, मरुस्थल में शीतल जल। ऐसे हैं हमारे शिव गुरूवर! रोते को हंसना सीखा दें। लङखङाते को चलना सीखा दें; ऐसे हैं हमारे पैग़म्बर मुहम्मद! चिङिया नाल जब बाज लङावा, ता गोविंद सिंह नाम कहावा! अपनी कृपा बल भर चिङिया में, बाज का नामो निशां मिटवा दें! ऐसे हैं हमारे गुरू गोविंद भगवन। मानवता की खातिर सूली चढें! ऐसे हैं हमारे प्रभु यीशु। हे दया के सागर,रहम के परवर दीगार,कृपालु और त्यागी जगत के पालनहार! अपने भक्तों के रक्षक बन उभरें, करें कोरोना का संहार! इस युग में आप सब मिल , करें आपस में अद्वितीय शक्ति का आगाज। -डॉ॰ मनोज कुमार, मनोवैज्ञानिक, पटना।

मेरे बस में नहीं बेकाबू मन।

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मेरे बस में नहीं बेकाबू मन। ------------------------------------- डा.मनोज कुमार  --------------------- वह अभी कालेज का पहला लेक्चर  मैम  से सुना।काफी प्रभावित हुअा।कुछ दिन तक आवाज उसके कानों मे गूंजती रही।एक दिन उसने पाया वह अपने टीचर के बारे मे ठीक नहीं सोच रहा।बहुत सोचा,विचार किया फिर भी उसके मन से वह बात नही जा रही थी,अब वह खुद को द्वोषी मानने लगा।लोगों से कटकर जीने लगा।घुटन इतनी की पढाई पर भी ध्यान नही हो पा रहा।लाख जतन किया लेकिन अपने विचारों पर से नियंत्रण पा न सका।आयुषि गूहणी है। उम्र कोई तेतीस साल।उनके मन मे सफाई का भूत सवार है।घर व दूसरे समान हमेशा चकाचक।सफाई के पीछे उनका इतना समर्पण है कि वह अपने पति व बच्चे का ख्याल नही रखती।अपने खफा हो रहे लेकिन उनको इसकी परवाह नहीं। सुकेश 38 साल के है ।जब भी टीवी या अखबार मे कुछ अप्रिय देखते सुनते है उनको अपने पुत्र के बारे मे दुखद सोचना शुरु कर देते है।हर पल पि्यजनो की मूत्यु या अशुभ सोच उनकी दिनचर्या चौपट कर रही।कभी नींद का उचटना तो कभी भूख की दुरी।सुख मानो कोसो दूर।चैन की बूंद भी नही।हर पल की कुछ न हो जाये मेरे...

रक्त का कतरा-कतरा जुटे।

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रक्त का  कतरा-कतरा जुटे जाये! शालीनता भरे इस इमारत में ।  मेहनत से उपजे पसीने की खूश्बू भी शरीक होकर, धूल- मिट्टी की चादर लपेट ले! धूप-छांव की परवाह किये बगैर मेरे राहों में बिछे कांटे भी उमंग व हौसले के उङान से वाह!लग रहें कितने प्यारे। यह प्यास हैं कामयाबी की जीत के उमंग के आगे  रास्ते की कठिनाइयाँ भी  पहाङों में मीठे जल-स्रोत सरीखे। -डॉ॰ मनोज कुमार

जानिये लालची होना भी एक रोग।

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सूदखोरी-घूसखोरी,भ्रष्टाचार -लालच की माया प्रीडोमिनेन्ट मानसिक रोग की छाया। --------------------------------- साब!खर्चा सब लेता हैं यहाँ मैं थोङे कम में सलटा दूंगा ।अपनी घिसी हुई दांतों को निपोरते हुए तपन बाबू की तरफ उस कर्मचारी ने देखा ।तपन बाबू कमीज की तरफ झांकते हुए दफ्तर से निकल लिए‌। पटना के गांधी मैदान के दक्षिण में बने बिस्कोमान को देखने की कोशिश की और फिर बगल में खङी गांधी जी की विशालकाय प्रतिमा को देखते हुए मुस्कुराते हुए निकलने लगे। गेट नं 2 के पास कुछ बच्चे खेल रहे थे उनको पकङा और मैदान में खुले रेस्टोरेंट्स में ले जाकर भरपेट खिला दिया।बच्चों के भरे पेट व मुस्कान ने उन्हें एक अजीब सूकून दिया । कारगिल चौक पर बने बस अड्डे से बस लिया और खुलने का इंतजार करने लगे।एक सीट खाली थी मै भी उनके बगल में बैढ गया।पानी की बोतल निकाली मैने और इशारे से पीने को पूछा तो कृतार्थ होकर मुस्कुराने लगे। "आप क्या करते हो?" मैने बोला सर मै समाज सेवा करता हूँ! नेता हो क्या जी ! मैने बताया मैं लोगो के मानसिक स्वास्थ्य पर काम करता हूँ । वाह!तब बताओ की मै परेशान हूं क्या! मनोवैज्ञानिक की हैसियत ...