आपस में मिल करें अद्वितीय शक्ति का आगाज।

आपस में मिल करें अद्वितीय शक्ति का आगाज।
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पत्थरों में फूल खिला दें!
बंजर भूमि को गुलशन बना दें,
मरुस्थल में शीतल जल।
ऐसे हैं हमारे शिव गुरूवर!
रोते को हंसना सीखा दें।
लङखङाते को चलना सीखा दें;
ऐसे हैं हमारे पैग़म्बर मुहम्मद!
चिङिया नाल जब बाज लङावा,
ता गोविंद सिंह नाम कहावा!
अपनी कृपा बल भर चिङिया में,
बाज का नामो निशां मिटवा दें!
ऐसे हैं हमारे गुरू गोविंद भगवन।
मानवता की खातिर सूली चढें!
ऐसे हैं हमारे प्रभु यीशु।
हे दया के सागर,रहम के परवर दीगार,कृपालु और त्यागी जगत के पालनहार!
अपने भक्तों के रक्षक बन उभरें,
करें कोरोना का संहार!
इस युग में आप सब मिल ,
करें आपस में अद्वितीय शक्ति का आगाज।
-डॉ॰ मनोज कुमार, मनोवैज्ञानिक, पटना।

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Dr Manoj Kumar brief profile

जब तक पिता जी के छांव में थे!सच पूछिये हम जी रहे थे बङे बेफिक्र होकर।उनके कोमल स्पर्श से बन ऊर्जावान !सिर पर मिले आशीष से हर दुःख, मानो हो जाता था चित।वह थे तो दुनिया रंग-बिरंगी मानोइंद्रधनुषी रंग से नहायी !सपने देखा जब भी मैंने , अगले पल हौसला पिताजी ने बढाया।वह थे तो मानो मन की थी रोज दिवाली !रूखी -सूखी रोटियां भी स्वाद में निराली थी।जिनकी उंगली पकङ इठलाया था कभी!करोङो के दौलत भी मानो अब बेमानी।पिता हैं तो सब सुख है!हम सब प्राणियों का वजूद है।उनके बिना जीवन में क्या चैन!इस जीवन में माता-पिता हैं अनमोल।पिता को समझिए,वह दर्शन हैं !वह तो इस संसार में हमारे नींव निर्माता ।ईश्वर की तरह पिता को पूज लिए जिस संतान ने!जीवन के असल मायने पा लिए उस इंसान ने।🙏🙏-डॉ॰ मनोज कुमार