एक दस का नोट!

एक दस का नोट!
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मोहब्बत की तलाश में !
जेब भारी कर घुमा करता एक आशिक ।
दिन-दोपहरी प्यार के खोज में!
मारा-मारा फिरता एक परवाना।
एक दिन उसे मिल ही गयी,
वो सपनों की शहजादी।
जेब में रख एक सौ का नोट!
दुनिया से बेपरवाह स्वतंत्र सा वह।
तब उस समय नब्बे का पेट्रोल भरा,
मेहबूबा को सैर कराता तना हुआ सा वह दिल का रोगी।
घूमते-घूमते थक हार प्रियतमा को जलपान की अलख लगी!
पाकिट से एक दस का नोट निकाल।
पानी-पुङी खाकर अपनी प्रेयसी के संग वह आशिक घर लौट गये।
प्रेम में बहुत पैसे की जरूरत नहीं!
बस है जरूरी एक दस का नोट।
--(डॉ॰ मनोज कुमार, मनोवैज्ञानिक, पटना द्वारा रचित।)

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