अंतर्राष्ट्रीय यक्ष्मा दिवस २०२१

विश्व यक्ष्मा दिवस 2021 पर एक शपथ लें!हम सब मिलकर बीमारी को खत्म करें।टी.बी बीमारी से ग्रस्ति व्यक्ति की कमजोरी के लिए उचित व पौष्टिक आहार प्रदान करने में सहयोग करें।परिवार या आपके आसपास के किसी व्यक्ति को यह बीमारी हुयी हो तो उनका सम्मान कर उनके हौसले को बुलंद करें।नियमित दवा व मानसिक स्वास्थ्य को उत्तम रखने से टी.बी रोगियों में रोग प्रतिरोधी क्षमता बढती है।  इस रोग के हो जाने पर चिंता बढ जाती है।  रोगी अवसाद से भी पीड़ित हो सकता है। इसलिए हमसब को इस रोग से लङना है रोगियों से मानवीय व्यवहार व पूर्ण अपनत्व के साथ!
-डॉ॰ मनोज कुमार, मनोवैज्ञानिक, पटना।

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डॉ॰ मनोज कुमार, मनोवैज्ञानिक, पटना संक्षिप्त परिचय ।

Dr Manoj Kumar brief profile

जब तक पिता जी के छांव में थे!सच पूछिये हम जी रहे थे बङे बेफिक्र होकर।उनके कोमल स्पर्श से बन ऊर्जावान !सिर पर मिले आशीष से हर दुःख, मानो हो जाता था चित।वह थे तो दुनिया रंग-बिरंगी मानोइंद्रधनुषी रंग से नहायी !सपने देखा जब भी मैंने , अगले पल हौसला पिताजी ने बढाया।वह थे तो मानो मन की थी रोज दिवाली !रूखी -सूखी रोटियां भी स्वाद में निराली थी।जिनकी उंगली पकङ इठलाया था कभी!करोङो के दौलत भी मानो अब बेमानी।पिता हैं तो सब सुख है!हम सब प्राणियों का वजूद है।उनके बिना जीवन में क्या चैन!इस जीवन में माता-पिता हैं अनमोल।पिता को समझिए,वह दर्शन हैं !वह तो इस संसार में हमारे नींव निर्माता ।ईश्वर की तरह पिता को पूज लिए जिस संतान ने!जीवन के असल मायने पा लिए उस इंसान ने।🙏🙏-डॉ॰ मनोज कुमार